गुरु से उनके शिष्य ने पूछा-"शास्त्रों मेंसम्यक जीवन श्रेष्ठ क्यों कहा गया है?" उन्होंने उत्तर दिया- "अति सर्वत्र वर्जयेत् । शास्त्र अति को गलत मानते हैं।अत्यधिक स्वाभिमानी होने के कारण रावण मारा गया और अत्यधिक दानी होने के कारण बलि को बिकना पड़ा। इसलिए शास्त्र संतुलित एवं सम्यक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। यही श्रेष्ठ जीवन है।"
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