insta👉AKHANDknowledgeinstagram-akhandknowledge शिक्षा संपूर्ण होने पर गुरु ने शिष्य से कहा- "पुस्तकों में जितना ज्ञान था, वह तुमने अर्जित कर लिया है। अब मेरे साथ एक दिन नगर भ्रमण पर निकलो, ताकि तुम्हें जीवन-विद्या दी जा सके।" गुरु शिष्य को लेकर निकले। मार्ग में उन्होंने देखा कि एक किसान खेत सींचने में व्यस्त है। वे वहां देर तक खड़े रहे, परंतु उस किसान ने उन्हें आंख उठाकर भी नहीं देखा। आगे चलने पर उन्हें एक लोहार लोहा पीटता दिखा, उसने भी उन्हें देख कर अनदेखा कर दिया। आगे चलने पर उन्हें तीन थके पथिक दीखे, जो पथरीली जमीन पर आनंद से सो रहे थे।
अब गुरु शिष्य से बोले- "देखो वत्स! कुछ पाने के लिए कुछ देना पड़ता है। किसान परिश्रम देता है तो लहलहाते खेत का परिणाम मिलता है। लोहार पसीना लगाता है तो धातुु सिद्ध होती है। यात्री निमग्न हो जाते हैं तो हर परिस्थिति मे आनंद प्राप्त कर सकतेे हैं। तुम भी अपने परिश्रम सेेे ज्ञान का खेेत सीचों, तपस्या की आंच में सफलता को सिद्ध करो और जीवन-मार्ग में स्वयं को निमग्न कर प्राप्त करो। यही मेरी शिक्षा का मूूल मर्म है।"
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