इसमें लिखा है - पेट पालने के लिए दूसरों पर आश्रित रहना, उनके इशारे पर चलना तो पड़ता ही है, पर मेरे लिए यह असह्य है कि पैसे के लिए ही विका रहूं और जिंदगी के कीमती क्षणों को ऐसे ही गंवाता, बर्बाद करता रहूं। अब इस सर्वस्वीकृत दर्रे पर चलते रह सकना मेरे लिए संभव न हो सकेगा। मैं कुछ ऐसा करूंगा, जो मुझे करना चाहिए। सो यह लीजिए मेरा इस्तीफा। वास्तव में कर्तव्य की पुकार व्यक्ति को बेचैन करती है और उसे वह करा लेती है जिसके लिए उसका जन्म हुआ है।
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Thursday, April 9, 2020
नोबेल पुरस्कार विजेता विलियम फॉकनर (सत्य घटना):- वास्तव में कर्तव्य की पुकार व्यक्ति को बेचैन करती है और उसे वह करा लेती है जिसके लिए उसका जन्म हुआ है।
नोबेल पुरस्कार विजेता और प्रख्यात लेखक विलियम फॉकनर किसी जमाने में मिसीसिपी डाकखाने में एक मामूली क्लर्क थे। उनकी आयु का एक बड़ा हिस्सा इस नौकरी में निकल चुका था। अपनी जीवन का श्रेष्ठतम उपयोग करने के लिए उनकी आत्मा बहुत तड़पती थी, पर वेतन देने वाले अधिकारी डाक के अतिरिक्त और कुछ करने की जरा-सा भी अवकाश देने को तैयार न थे। एक दिन वे बहुत उद्विग्न हो उठे और भविष्य की आजीविका का बिना कुछ विचार किए इस्तीफा लिखने बैठ गए। आवेश में लिखा वह इस्तीफा पोस्ट मास्टर जनरल के पास पहुंचा और वहां उसे स्वीकार भी कर लिया गया उसके बाद में साहित्य सृजन के कार्य में दत्तचित होकर लग गए। वहां आवेश भरा इस्तीफा राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित है और पर्यटकों के लिए एक कौतूहल की ही पूर्ति नहीं करता, अपितु एक प्रेरणा और दिशा भी देता है।
Good
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